दुर्गा स्तोत्र
संकटनाशन दुर्गा स्तोत्र का पाठ मां दुर्गा की कृपा और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए किया जाता है, जिसमें देवी को सर्वशक्तिमान, विश्वरूपिणी और भक्तों की रक्षक बताया गया है। यह स्तोत्र मुख्य रूप से श्रीकृष्ण द्वारा रचित है और इसे नवरात्रि के दौरान पढ़ने से सभी दुखों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
श्रीकृष्ण कृत संकटनाशन दुर्गा स्तोत्र (हिंदी अर्थ सहित)
1) त्वमेव सर्वजननी मूलप्रकृतिरीश्वरी।
त्वमेवाद्या सृष्टिविधौ स्वेच्छया त्रिगुणात्मिका॥
(हे माँ! आप ही सबकी माता, मूल प्रकृति और ईश्वरी हो। सृष्टि के प्रारंभ में स्वेच्छा से ही आप त्रिगुणात्मिका (सत्व, रज, तम) रूप धारण करती हो।)
2) कार्यार्थे सगुणा त्वं च वस्तुतो निर्गुणा स्वयम्।
परब्रह्मस्वरूपा त्वं सत्या नित्या सनातनी॥
(कार्यों को सिद्ध करने के लिए आप सगुण रूप धारण करती हैं, लेकिन वास्तव में आप निर्गुणा हैं। आप परब्रह्मस्वरूपा, सत्य, नित्य और सनातनी हैं।)
3) तेजःस्वरूपा परमा भक्तानुग्रहविग्रहा।
सर्वस्वरूपा सर्वेशा सर्वाधारा परात्परा॥
(आप तेजस्वरूपा, परम तत्व और भक्तों पर कृपा करने के लिए दिव्य शरीर धारण करने वाली हैं। आप ही सर्वस्वरूपा, सर्वेश्वरी, सबका आधार और सबसे परे हैं।)
4) सर्वबीजस्वरूपा च सर्वपूज्या निराश्रया।
सर्वज्ञा सर्वतोभद्रा सर्वमंगलमंगला॥
(आप ही सबका बीज, सर्वपूजनीय और निराश्रय हैं। आप ही सर्वज्ञ, सबका मंगल करने वाली और सर्वमंगल की भी मंगल हैं।)
5) सर्वबुद्धिस्वरूपा च सर्वशक्तिस्वरूपिणी।
सर्वज्ञानप्रदा देवी सर्वज्ञा सर्वभाविनी॥
(आप ही सबकी बुद्धि, शक्ति और ज्ञान प्रदान करने वाली देवी हैं। आप ही सब कुछ जानने वाली और सबको उत्पन्न करने वाली हैं।)
6) त्वं स्वाहा देवदाने च पितृदाने स्वधा स्वयम्।
दक्षिणा सर्वदाने च सर्वशक्तिस्वरूपिणी॥
(देवताओं के यज्ञ में आप ही स्वाहा, पितरों के श्राद्ध में आप ही स्वधा और सब दानों में आप ही दक्षिणा हैं। आप ही सर्वशक्ति स्वरूपा हैं।)
दुर्गा स्तोत्र पाठ के लाभ:
- यह स्तोत्र मानसिक शांति और धैर्य प्रदान करता है।
- शत्रुओं और बाधाओं पर विजय पाने में मदद मिलती है।
- मानसिक और शारीरिक सुख मिलता है।
