दुर्गा स्तुति देवी दुर्गा की पूजा और स्तुति का एक शक्तिशाली माध्यम है, जो मुख्य रूप से मार्कंडेय पुराण के ‘देवी महात्म्य’ पर आधारित है। यह स्तुति भक्तों को शक्ति, सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है, विशेष रूप से नवरात्र के दौरान इसे पढ़ना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रसिद्ध दुर्गा स्तुति मंत्र और श्लोक (हिंदी में):
- सर्व मंगल मंगल्ए:
“सर्व मंगल मांगल्ए शिवे सर्वार्थ साधिके,
शरण्ए त्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।।”
- शक्ति रूपेण (स्तुति मंत्र):
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।”
- जयन्ती मंगला काली (पुष्पांजलि):
“जयन्ती, मंगला काली, भद्रकाली, कपालिनी।
दुर्गा, शिवा, क्षमा, धात्री, स्वाहा, स्वधा नमोस्तुते।।”
दुर्गा स्तुति (हिंदी भावानुवाद – लघु रूप):
जय जग जननी आदि भवानी, जय महिषासुर मारिणी माँ।
हे महालक्ष्मी हे महामाया, तुम में सारा जगत समाया।
शैल सुता मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा कूष्मांडा माँ।
कालरात्रि महागौरी तुम हो सकल रिद्धि सिद्धि धारिणी मां।
दुर्गति नाशिनी दुर्मति हारिणी दुर्ग निवारण दुर्गा मां, भवभय हारिणी भवजल तारिणी सिंह विराजिनी दुर्गा मां।
दुर्गा स्तुति का महत्व:
- यह मंत्र नकारात्मकता को दूर करता है और शत्रुओं पर विजय दिलाता है।
- नियमित पाठ से स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि में वृद्धि होती है।
- यह आत्म-विश्वास और आंतरिक शक्ति को बढ़ाता है।
विशेष: आप इन स्तुतियों का पाठ प्रतिदिन या विशेष रूप से दुर्गा पूजा/नवरात्र के दौरान कर सकते हैं।
